सच्च तो कड़वा होता है।

बड़ी होती जा रही है इमारतें, छोटे होते जा रहे है मन, बड़ी होती जा रही है इच्छाएं, देने के नाम पर, मुठीयाँ हो जाती है तंग, फिर भी, सब के मन मे बैठा है मासुम - सा - बच्चा, रोटा है बिलखता है, माटी के खिलौने चाहिए उसे, खुले ...Read more