एक किनारा

एक कश्ती देखी मैंने , ढूंढती फिरती थी एक किनारा , ऐसा नहीं था कि किनारा मिला नहीं , मिले तो सही पर ,"मन" का नहीं, ढूंढते-ढूंढते थक गई, बीच भंवर में फंस गई । सोचती थी , क्या कोई मन का मीत नहीं , क्या कोई मन का गीत ...Read more